एक घर में अंधेरा कर दूसरे में उजाला करने जैसी है कर्जमाफी, वोट के लिए ऐसे कटती है आपकी जेब

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Farm loan waiver and its impact on taxpayer

लोकसभा चुनाव नजदीक है और ऐसे में देश की दो सबसे बड़ी पार्टियां अपने-अपने तरीकों से जनता को रिझाने की कोशिश में लगी हुई हैं। इससे पहले राज्यसभा चुनावों में तीन राज्यों में कांग्रेस की सरकार बन गई है। विषेशज्ञों की बात माने तो मोदी लहर के विपरीत इन चुनावों में कांग्रेस की जीत का सबसे बड़ा कारण किसानों से कर्ज माफी का वादा है। यानि अब हर पार्टी और नेता अपने वोटरों से कर्जमाफी का वादा करता हुआ नजर आ रहा है। लेकिन, क्या आपको मालूम है कि कर्जमाफी की मार आम कर दाताओं पर कैसे पड़ती है? कैसे किसी राज्य में कर्जमाफी का असर एक आम नौकरी करने वाले व्यक्ति और उसके परिवार पर पड़ती है? तो आइये आपको बताते हैं कि कर्जमाफी का आम जनता पर असर कैसे पड़ता है?



कर्जमाफी का आम जनता पर असर कैसे होता है असर?

हालिया कुछ सालों में जिन राज्यों में कर्जमाफी की गई है उनके आकड़े देखें तो ये बात साफ होती है कि कर्जमाफी का आम जनता पर असर कैसे पड़ा है। दरअसल, किसानों की कर्ज माफी को वोट के लिए इस्तेमाल करने से राज्यों के खजाने पर असर पड़ा है। कर्जमाफी की शुरुआत सबसे पहले महाराष्ट्र से हुई जिससे राज्य को 34,000 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचा और महाराष्ट्र की जीडीपी 1.3 फीसदी कम हो गई। इसके बाद उत्तर प्रदेश में 36,000 करोड़ रुपये की कर्ज माफी हुई और राज्य की जीडीपी 2.7 फीसदी कम हो गई।



इसी तरह से पंजाब में 10,000 करोड़ की कर्जमाफी के कारण जीडीपी में 2.1 फीसदी की कमी हुई। कुछ ऐसे ही आकड़े राजस्थान के भी हैं। आंकड़ों की बात करें तो साल 2017 से कुल 1 लाख 72 हजार 146 करोड़ रुपये की कर्ज माफी हो चुकी है, जिसका साफ तौर पर असर राज्य और उसकी वजह से देश की जीडीपी पर पड़ा है। साल 2008 में मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार ने देशभर के किसानों का 70,000 करोड़ रुपये का कर्ज माफ करने का ऐलान किया। लेकिन, चार साल में उनकी सरकार केवल 52,000 करोड़ रुपये का कर्ज ही माफ कर पाई। इसी तरह के आंकड़े कुछ अन्य राज्यों के भी हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह से है कि ऐसे चुनावी वादों से सिर्फ वोट लिया जाता है और कर्जमाफी के बावजूद इसका फायदा किसानों तक नहीं पहुंच पाता।

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देश में 2017 के बाद से अभी तक सात राज्यों में कर्ज माफी का ऐलान हो चुका है। सबसे चिंता करने वाली बात ये है ये सभी देश के बड़े राज्य हैं। इनमें पंजाब, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश शामिल हैं। बात कर्जमाफी का आम जनता पर असर की करें तो इसके चलते उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र की सरकार को अपना बजट कम करना पड़ा। उत्तर प्रदेश में इसकी वजह से विकास के एक-तिहाई काम रोक दिये गए। महाराष्ट्र सरकार को तो शिरडी मंदिर से कर्ज तक लेना पड़ा। यानि इससे विकास की रफ्तार धीमी पड़ गई।



जाहिर है एक तरफ तो कर्ज माफी से देश और राज्य के विकास दर पर असर पड़ा है तो वहीं इसका सबसे बड़ा खामियाजा एक आम टैक्स पेयर को भरना पड़ा है और आगे भी भरना पड़ेगा। यानि कहा जा सकता है कि किसानों की कर्जमाफी एक घर में अंधेरा कर दूसरे में उजाला करने जैसी है। कर्जमाफी किसानों की समस्या हल करने का कोई विकल्प नहीं है। बल्कि इसकी जगह उन्हें बेहतर सुविधाएं और खेती के लिए जरुरी साधन उपलब्ध कराएं जाये। जिससे उनकी कमाई बड़े और उन्हें कर्ज लेने की जरुरत ही न पड़े।

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