एनकाउंटर पर सीना फुलाता और रेपिस्ट के आगे दुम हिलाता उत्तर प्रदेश का लाचार, बेबस और बिकाऊ ‘कानून’

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विद्रोही कवि धूमिल ने उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर तीखा वार करते हुए एक बार कहा था – ‘इस कदर कायर हूं कि उत्तर प्रदेश हूं।’ यह लाइन उन्होंने करीब 5 साल पहले कही थी। लेकिन, यह वर्तमान में हो रही उत्तर प्रदेश की घटनाओं पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं। भले ही योगी आदित्यनाथ कह रहे हो कि अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन, इस मामले में हो रही देरी और जेल में पीड़िता के पिता की मौत कई सवाल खड़े करती है।

योगी आदित्यनाथ जिस तरह से धड़ाधड़ एनकाउंटर कर अपनी पीठ थपथपा रहे थे वैसी बहादूरी वो एक महिला को न्याय दिलाने के लिए क्यों नहीं दिखाते? जो अपनी आबरू के तार-तार होने के बाद न्याय की गुहार लगा रही है। बीजेपी से तो ऐसी उम्मीद न थी? समाजवादी पार्टी के गुंडाराज से मुक्ति दिलाने के लिए ही प्रदेश की जनता ने बीजेपी को ऐतिहासिक जीत दिलाई थी। लेकिन, एनकाउंटर का बढ़ता ग्राफ छोड़कर इसके बदले में प्रदेश कि जनता को क्या मिला?

महिला का योगी के विधायक से अपनी आबरू बचाते फिरना, एक साल से योगी सरकार से न्याय की मांग करना और उसके पिता की संदिग्ध हालात में जेल में मौत हो जाना ये वो सवाल हैं जिनकी गूंज शायद 2019 में भी सुनाई दें। यूपी के उन्नाव जिले से बीजेपी विधायक कुलदीप सेंगर पर रेप का मामला अब प्रदेश नहीं बल्कि देश का मामला बन गया है। इसके बावजूद मामले में पुलिस और सरकार की भूमिका सवालों के घेरे में है।

जब इस मामले में सब कुछ कंट्रोल के बाहर हो गया तो योगी सरकार नींद से जागी और आरोपी विधायक के भाई को गिरफ्तार किया गया। लेकिन, पीड़िता के मुताबिक मुख्य आरोपी यानि विधायक अभी भी खुलेआम घुम रहे हैं।  विधायक नेताओं के रटे-रटाये बयान बोलकर अपनी सफाई दे रहे हैं कि मुझे फंसाने का षड्यंत्र किया जा रहा है।

शर्मनाक बात तो ये है कि ये महिला पिछले एक सालों से उत्तर प्रदेश के लाचार, बेबस और बिकाऊ ‘कानून’ से न्याय मांग रही है लेकिन अभी तक उसे न्याय नहीं मिला। हां, कुछ मिला तो उसके पिता को मौत मिली जो  पीड़िता के आत्मदाह की कोशिश करने वाली उसी रात पुलिस कस्टडी में मर गए। उत्तर प्रदेश का लाचार, बेबस और बिकाऊ ‘कानून’ एक महिला को न्याय तो नहीं दिला सका उसके पिता का साया उसके सिर से जरुर छिन लिया। ‘बेटी बचाओ…..’ आगे कि लाइन आप खुद सोच लो की बेटी किससे बचानी है?

ये लेखक के अपने विचार हैं। इसका किसी भी तरह से नव-राष्ट्र टाइम्स से कोई संबंध नहीं है।

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