कहीं बड़ा न हो जाए बुराइयों का पेड़, एक बार जरुर पढ़ें ये रोचक कहानी

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कई साल पहले एक बहुत ही धनी आदमी रहता था। उस धनी आदमी का एक ही बेटा था। इसलिए वह उससे बेहद प्यार करता था। लेकिन, उसके बेटे में कई बूरी आदतें थीं। ये बात उस धनी आदमी को मालूम थी। इसलिए वो अपने बेटे से बुरी आदत छोड़ने को कहता था। लेकिन, उसका बेटा हर बार ये कहकर उसकी बात टाल देता था कि वह तो अभी छोटा है। बड़ा होने पर अपनी सारी बूरी आदतें छोड़ देगा। ऐसे ही समय बीतता गया।

एक दिन नगर में एक महात्मा जी आये। अपने बेटे की आदतों से परेशान पिता को महात्मा के बारे में पता चला तो वो उनके पास गया और अपने बेटे के बारे में बताया। पिता की बात सुनकर महात्मा जी ने सुबह अपने बेटे को अपने साथ लाने के लिए भेजा। महात्मा के बताये अनुसार, पिता अपने बेटे को लेकर महात्मा जी के पास पहुंचा। महात्मा जी बेटे को एक बगीचे में ले गए और एक छोटा सा पौधा उखाड़ने को कहा। लड़के ने तुरंत ही उस पौधे को उखाड़ दिया।

थोड़ी दूर आगे जाने पर एक और छोटा सा पेड़ दिखा। महत्मा जी ने उसको भी उखाड़ने के लिए कहा लड़के ने उसे भी उखाड़ दिया। लड़के का पिता महात्मा जी को ऐसा करते देख रहा था। इसी तरह कुछ और पेड़ उखाड़ने के बाद आगे एक बड़ा और मजबूत सा पेड़ दिखाई दिया। महात्मा जी ने लड़के से कहा – इसको भी उखाड़ दो। लड़के ने बहुत कोशिश की लेकिन वह कामयाब नहीं हो सका।

इसके बाद, महात्मा जी ने लड़के को बुलाकर कहा, जिस तरह तुम इस बड़े पेड़ को नहीं उखाड़ पाये। वैसे ही तुम अपनी बुरी आदतों को बड़े होने पर नहीं बदल पाओंगे। इसलिए तुम्हें अपनी बूरी आदतें बचपन में ही छोड़ देनी चाहिए। क्योंकि, वक्त के साथ साथ तुम्हारी बूरी आदते भी मजबूत होती जाएंगी। लड़का महात्मा की बात समझ गया और बुरी आदते छोड़ने की कसम खाई।

इस कहानी से हमें सिखने को मिलता है कि हमें अपनी बुरी आदतें बचपन में ही छोड़ देनी चाहिए। क्योंकि, बड़े होकर  हम ये आदतें नही छोड़ पाएंगे।

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