मुख्तार अंसारी : वो शख्स जो अपराधी से नेता और फिर पूर्वांचल का रॉबिनहुड बन गया

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History of Mukhtar Ansari

लखनऊ – वैसे तो उत्तर प्रदेश की सियासी जमीन पर कई अपराधी पैदा हुए, जिन्होंने सूबे की राजनीति को भी प्रभावित किया। लेकिन, मुख्तार और बृजेश सिंह ऐसे दो नेता हैं, जिन्होंने पुर्वांचल को एक अलग पहचान दी। आज हम बात कर रहे हैं पुर्वांचल के उस बाहुबली नेता की जिसका नाम मुख्तार अंसारी है। प्रदेश के माफिया नेताओं में मुख्तार अंसारी का नाम पहले पायदान पर माना जाता है। History of Mukhtar Ansari.

यूपी के गाजीपुर जिले के रहने वाले मुख्तार अंसारी के दादा मुख्तार अहमद अंसारी अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे। मुख्तार अंसारी ने बड़ो होकर सियासी राह पकड़ी। बाहुबली मुख्तार अंसारी और ब्रजेश सिंह की दुश्मनी जग जाहिर है। 1990 का दशक मुख्तार अंसारी का पूर्वांचल के मऊ, गाजीपुर, वाराणसी और जौनपुर में सिक्का चलने लगा था

1995 में मुख्तार अंसारी ने राजनीति की मुख्यधारा में कदम रखा। 1996 में मुख्तार अंसारी पहली बार विधान सभा के लिए चुने गए। मुख्तार अंसारी का राजनीतिक प्रभाव मुस्लिम वोट बैंक है। मुख्तार अंसारी जेल में बंद थे। इसी दौरान बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय को उनके 6 अन्य साथियों को सरेआम गोलीमार उनकी हत्या कर दी गई। 2012 में महाराष्ट्र सरकार ने मुख्तार पर मकोका लगा दिया था। उनके ख़िलाफ़ हत्या, अपहरण, फिरौती सहित जैसे कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।

बसपा से निष्कासित कर दिए जाने के बाद मुख्तार, अफजल और सिब्गतुल्लाह ने 2010 में खुद की राजनीतिक पार्टी कौमी एकता दल का गठन किया। मार्च 2014 में अंसारी ने घोसी के साथ-साथ और वाराणसी से नरेंद्र मोदी के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़ने की घोषणा की थी। हालांकि चुनाव के पहले उन्होंने अपनी उम्मीदवारी वापस लेते हुए कहा था कि उन्होंने धर्मनिरपेक्ष वोट का विभाजन रोकने के लिए ऐसा किया है। मुख्तार अंसारी ने दो बार बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और दो बार निर्दलीय। वह लगातार चौथी बार विधायक हैं।

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